भारतीय टीम ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है  © PTI
भारतीय टीम ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है
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भारतीय क्रिकेट बोर्ड और उसके समकक्ष बांग्लादेश, श्रीलंका और जिम्बाब्वे बोर्ड ने भले ही टू- टायर प्रणाली का विरोध किया हो और प्रस्ताव अगले कुछ दिनों के लिए ठंडे बस्ते में चला गया हो। लेकिन इसमें कई ऐसी बातें हैं जिनसे आम जनता पूरी तरह से अनभिज्ञ है। इसमें सबसे पहले जानने वाली बात है कि क्या क्रिकेटप्रेमी ये जानते कि यह टू टायर सिस्टम है क्या? क्या क्रिकेटप्रेमियों ने बीसीसीआई और अन्य क्रिकेट बोर्डों के द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकराने की वजह जान ली है? इस प्रणाली का उन देशों पर क्या प्रभाव पड़ेगा जो टेस्ट देश होते हुए भी दूसरे ग्रुप में रख दिए जाएंगे? इससे किसके हित को साधने की कोशिश की जा रही है, क्रिकेट या व्यवसाय के?

भले ही अभी के लिए ‘टू टायर सिस्टम’ को खारिज कर दिया गया हो, लेकिन जैसे ही क्रिकेट खेलने वाले देश एक फ्रेश साइकिल में प्रवेश करेंगे तो ये सवाल एक बार फिर से उठेगा। तीन बड़े प्रस्तावों को पहले से ही खारिज किया जा चुका है जिसका मतलब है कि टेस्ट खेलने वाले देश ‘फ्यूचर टूर प्रोग्राम'(एफटीपी) में फिर से वापस आ गए हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) नियंत्रित करेगा। जिन्हें इसके बारे में पता नहीं है उन्हें बता दें कि ‘एफटीपी’ उसी समय वापस आ गया था जब शशांक मनोहर ने आईसीसी के स्वतंत्र अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था।

लेकिन, टू- टायर टेस्ट क्रिकेट का मुद्दा चर्चा के लिए फिर से कब उठेगा, क्या इसको मंजूरी दी जाएगी? अगर वर्तमान परिदृश्य से देखें तो यह संभव होता नजर नहीं आ रहा है। इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए आइए आईसीसी के द्वारा प्रस्तावित किए गए इस प्रस्ताव को गहराई से समझते हैं

टू- टायर टेस्ट क्रिकेट का मतलब क्या है: इस प्रणाली के अंतर्गत, दो ग्रुप बनाए जाएंगे जिसमें पहले टायर में कुल 7 टीमें होंगी वहीं दूसरे ग्रुप में 5 टीमें होंगी। 10 टेस्ट खेलने वाले देशों में से, पहले टायर में शीर्ष 7 देश होंगे वर्तमान रैंकिंग के हिसाब से जिम्बाब्वे, बांग्लादेश और वेस्टइंडीज दूसरे टायर में होंगे। दूसरे टायर में दो नवागंतुकों भी होंगे जो अफगानिस्तान और आयरलैंड होंगे।

कैसे काम करेगी टू- टायर टेस्ट क्रिकेट प्रणाली: अगर टू टायर टेस्ट क्रिकेट प्रणाली लागू की जाती है तो शीर्ष की सात टीमें एक दूसरे के खिलाफ ज्यादा खेलेंगी जिनमें बड़ी टीमों के बीच ज्यादा मैच होंगे जैसे इंग्लैंड बनाम दक्षिण अफ्रीका, या भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया या एशेज की ही तरह इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया होने लगे। लेकिन भारत और पाकिस्तान के मनमुटाव होने की वजह से इन दोनों देशों के बीच हाल फिलहाल में मैच होना संभव नहीं है।

भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत के बारे में ज्यादा बोला और लिखा नहीं गया है और जैसा कि दोनों आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में क्रमशः दूसरे और पहले स्थान पर बरकरार हैं। यह और भी दिलचस्प हो जाता अगर आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गेम में शीर्ष की दो टीमों के बीच मैच होता लेकिन गौर करने वाली बात है कि वर्तमान में भारत और पाकिस्तान एक दूसरे से नहीं खेल रहे हैं।

जो टीमें ‘टू टायर ग्रुप’ में होंगी वे सिर्फ एक दूसरे के खिलाफ ही खेलेंगी। इसलिए अगर आयरलैंड और अफगानिस्तान टेस्ट क्रिकेट में अपने ग्रुप में मौजूद दूसरे देशों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो उनके पास बड़ी टीमों के खिलाफ खेलने का मौका होगा। इसमें संवर्धन और निर्वासन प्रणाली होगी। जिसका मतलब है कि जो टीम पहले टायर में खराब प्रदर्शन करेगी वह निर्वासित होंगी वहीं जो टीम टायर टू में अच्छा प्रदर्शन करेगी उसे संवर्धित किया जाएगा।

टू- टायर टेस्ट क्रिकेट के लाभ: टेस्ट देशों की संख्या बढ़ेगी। अफगानिस्तान और आयरलैंड कई सालों से टेस्ट दर्जा पाने के लिए दरवाजे पर खड़े हैं लेकिन इस दौरान किसी ने भी उनकी आवाज नहीं सुनी। अगर टू-टायर टेस्ट क्रिकेट सिस्टम लागू किया जाता है तो इससे उन्हें टेस्ट क्रिकेट अखाड़े में तुरंत प्रवेश मिल जाएगा। ये भले ही थोड़ा अटपटा लगे लेकिन इस प्रणाली के सहारे उन देशों के पास मौका होगा टायर टू में शीर्ष में पहुंचने का जो लंबे समय से रैंकिंग में तली में डले हुए हैं। इसमें घरेलू और विदेशी टेस्ट श्रृंखलाओं में शीर्ष टीमों से लगातार हार झेलने वाली टीमों वेस्टइंडीज, श्रीलंका और बांग्लादेश के पास मजबूत टीम के रूप में उभरने का एक अच्छा मौका होगा।

शीर्ष टीमों के लिए भी प्रतिस्पर्धा कड़ी हो जाएगी। वो दिन गए जब छोटी टीमों के खिलाफ क्लीन स्वीप हासिल करने से शीर्ष टीमों को जरूरी प्वाइंट मिल जाते थे और उनकी फॉर्म और गति ठीक हो जाती थी। शीर्ष 7 टीमों को अपने गेम में हर समय शीर्ष पर रहना होगा। वहीं जो टीमें छठवें और सातवें नंबर पर होंगी उन्हें अपनी पोजीशन को बचाने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ेगा। अगर वह यह नहीं कर पाई तो उन्हें निर्वासित(relegate) कर दिया जाएगा।

जाहिरतौर पर, इस प्रणाली की झलक द्विपक्षीय श्रृंखला से बिल्कुल अलग होगी। क्योंकि यहां या वहां हासिल की जाने वाली एक जीत से बात नहीं बनेगी। अगर टीम को पहले टायर में अपने आपको बरकरार रखना है तो उसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। लगभग सभी टेस्ट खेलने वाले देशों का विदेशों में रिकॉर्ड खराब है। ऑस्ट्रेलिया को विदेशी दौरों में टेस्ट में खराब प्रदर्शन करने के लिए तो जाना ही जाता है वहीं उप महाद्वीप की टीमों ने भी इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका में बहुत कम मैच ही जीते हैं।

टू टायर टेस्ट क्रिकेट प्रणाली की कमियां: इस सिस्टम की सबसे बड़ी कमी ये है कि इससे क्रिकेट पूल दो भागों में बंट जाएगा और इसमें कमजोर टीम के पास मजबूत टीम से खेलने के बहुत कम मौके होंगे। वेस्टइंडीज, जो पिछले दिनों में टेस्ट क्रिकेट में कुछ खास नहीं कर रहे हैं, वह ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का दौरा नहीं करेगी— जिनके खिलाफ उनका टेस्ट क्रिकेट का गजब का इतिहास रहा है।

अफगानिस्तान और आयरलैंड को भले ही टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश मिल जाएगा लेकिन सबसे बड़ा तथ्य है कि उनके पास शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने का मौका नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर अफगानिस्तान एक टेस्ट मैच खेलने के लिए भारत का दौरा करती है तो उनके पास भारतीय खिलाड़ियों से फील्ड के भीतर और बाहर सीखने का बहुत मौका होगा।

इस प्रणाली के आधार पर आयरलैंड को अपनी अनुकूलित पिच पर इंग्लैंड के खिलाफ खेलने का मौाका नहीं मिलेगा क्योंकि दोनों दो भिन्न ग्रुप में होंगे और इस ग्रुप की दूरी को पाटने के लिए आयरलैंड को पहाड़ जैसी चढ़ाई तय करनी होगी। इसमें कुछ व्यवसायिक हित भी जुड़े हैं जिन्हें नकारा नहीं जा सकता। इसमें ज्यादा व्यवसायिक हित तब होंगे जब पहले टायर की टीमे भिड़ रही होंगी। लेकिन वही चीज दूसरी हो जाएगी जब मैच टू टायर टीमों के बीच खेला जाएगा। यह एक दूसरा तथ्य है कि अमीर सिर्फ अमीर होंगे। उदाहरण के तौर पर भारत और पाकिस्तान के मैच को भारी मात्रा में महंगा विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप मिलेंगे वहीं वेस्टइंडीज बनाम अफगानिस्तान मैच में ऐसा नहीं होगा।

खिलाड़ी क्या कहते हैं: लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स टू टायर टेस्ट क्रिकेट प्रणाली के पक्ष में हैं। ‘ESPNCricinfo’ की एक रिपोर्ट बताती है कि लगभग 72 प्रतिशत वर्तमान क्रिकेटर इस प्रणाली के पक्ष में हैं। जिससे ये साफ तौर पर पता चलता है कि के ये सभी प्रतिस्पर्धा को लेकर लालायित हैं और हर टीम को मौका देना चाहते हैं।

निष्कर्ष: चाहे अच्छा हो या बुरा, अभी के लिए टू टायर टेस्ट क्रिकेट प्रणाली को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। क्या यह क्रिकेट के लिए सही साबित होगी या खराब, उसे क्रिकेटकंट्री दो अलग- अलग लेखों में समझाना चाहेगी। इसी समय ये भी समझना जरूरी है कि क्यों बीसीसीआई और श्रीलंका, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।